Jan 23, 2018

तीनों सशस्त्र सेनाओं के 14.50 लाख से ज्यादा कार्मिकों में गुस्सा


सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों के आधार पर तीनों सशस्त्र सेनाओं के 14.50 लाख से ज्यादा कार्मिकों में गुस्सा है। कारण उनकी सुविधाओं में जमकर कटौती की गई है। हाल में जारी एक आदेश के अनुसार अफसरों सहित सैन्य कर्मियों के लिए प्रथम 100 यूनिट बिजली फ्री में देना बंद कर दिया गया है। वहीं शांतिकाल जैसे इलाकों में तैनात रहने वाले अफसरों काे फ्री में राशन भी नहीं मिलेगा। जम्मू-कश्मीर, पूर्वोत्तर या युद्ध जैसे हालात वाले इलाकों में तैनात रहने वाले अफसरों को ही मुफ्त राशन की सुविधा दी जाएगी।


जवानों के लिए यह सुविधा सभी जगह लागू रहेगी। तीनों सेनाओं के देश भर में स्थित सैन्य क्षेत्रों के स्टेशन कमांडर की ओर से बिजली का शुल्क वसूलने का आदेश जारी किया गया है। इसके तहत थल सेना के 12.37 लाख, वायुसेना के 1.50 लाख और नौसेना के 67 हजार अफसरों व कार्मिकों को घर में प्रथम सौ यूनिट बिजली निशुल्क देने की सुविधा बंद कर दी गई है।

सातवां वेतनमान लागू होने की तिथि, यानी 6 जुलाई 2017 से बिजली की खपत के अनुसार प्रति यूनिट राशि वसूली जाएगी। इसके लिए एमईएस का लेखा विभाग घरों में लगे मीटर की रीडिंग ले रहा है और इसकी गणना कर सीधे ही सैलरी बनाने वाले अकाउंट विभाग को भेज रहा है। वहीं से सीधे सैलरी में से बिजली उपभोग का पैसा काटा जा रहा है।

दोहरी दुविधा में पीस टाइम ऑफिसर्स

रक्षा मंत्रालय किसी भी एरिया को शांतिकाल और युद्ध के हालात जैसे क्षेत्र के रूप में नोटिफाइड करता है। इसके अनुसार ही सैन्य बलों के कार्मिकों को सुविधाएं दी जा रही हैं। जैसे जम्मू-कश्मीर, पूर्वोत्तर, चीन से लगती सीमा को फील्ड पोस्टिंग माना गया है। वहीं जयपुर, जोधपुर या दिल्ली जैसे इलाके शांतिकाल वाले इलाकों में शामिल हैं। सातवें वेतनमान की सिफारिश लागू होने के बाद पीस टाइम ऑफिसर्स दोहरी दुविधा में हैं। जैसे किसी इलाके में आपदा हो गई और वहां रेस्क्यू के लिए टुकड़ी को भेजा गया है, ऐसे में जवान तो अपने राशन से काम चला लेंगे, लेकिन उसे लीड करने वाले अफसर को यह सुविधा स्वयं के स्तर पर जुटानी पड़ेगी।

- govemployees